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Rape!what does the law say??

Rape! what does the law say?? ( बलात्कार! क्या कहता है कानून??) नमस्कार आप सभी का इस ब्लॉग में। एक समय था जब महिलाओं को देवी स्वरूप पूजा जाता था,आज अखबार के पन्नों में इज़्ज़त का तार तार होना मानो आम बात हो गई है। यह ब्लॉग एक शर्मनाक कृत्य और उसके लिए दी गयी परिभाषा के विषय में है। जंहा एक ओर देश राम मंदिर, कश्मीर जैसे बड़े मुद्दों पर पार चुका है , निर्भया और न जाने कितनी निर्भयाओं के खून से सनी सड़कें यह ओकात दिखा देती है कि देश में महिला सुरक्षा किस कदर नाज़ुक-ए-सूरतेहाल में है साथ ही यह देश के एक वर्ग की तुच्छ मानसिकता को भी प्रदर्शित करती है। ‛बलात्कार' मात्र शब्द भर किसी की ज़िंदगी और मौत के बीच का फांसला बन जाता है। यदि मुगल काल और मुस्लिम राज्यों में सज़ाओं पर गौर की जाए तो शायद ही कोई ऐसी सज़ा होगी जो इस कूर कृत्य के लिए दी जाए। प्रश्न यह है कि किसी के जीवन की क्या कीमत लगा सकती है न्यायपालिका???? इस विषय पर ज्ञान के लिए आइए जान लें कि कानून के अंतर्गत इसकी परभाषा क्या है। हालांकि इस विषय मे फ़िल्म अभी हाली में बनी भी है। Section 373( सेक्शन375) भारतीय दंड संहित...

Dholavira A Mystery

Dholavira A Mystery (धोलावीरा एक रहस्य) स्वागत है आपका इस ब्लॉग में! आज का ब्लॉग पुर्णतः रहस्यात्मक विषय पर बना है । वैसे तो भारत की भूमि अपने भीतर अनेकों रहस्यों को दफनाए हुए है परंतु धोलावीरा भारतीय सभ्यता के उस राज को समेटे हुए है जिससे मानव सभ्यता के विकास को गहराई से समझने में सहायता मिलेगी।तो आइए चलते हैं उस रहस्यात्मक युग में जंहा से इसका उद्भव हुआ। धोलावीरा इस शब्द की उत्पत्ति उस काल में हुई जब सिंधु सभ्यता अपने व्यापारिक सम्बन्धों को मिस्त्र व मैसोपोटामिया से कायम कर रही थी। उनके इस व्यापारिक विस्तार ने इस बात पर मुहर लगा दी थी कि सिंधु घाटी सभ्यता मात्र एक छोटे क्षेत्र में विकसित नही हुई थी। सिंधु सभ्यता के 6 मत्वपूर्ण क्षेत्रों में मोहनजोदड़ो,कालीबंगन,लोथल, हड़प्पा,राखिगढ़ और धोलावीरा  प्रमुुुख थे।  विभाजन के बाद रेडक्लिफ रेखा ने यह प्रमाणित कर दिया कि मोहनजोदड़ो जो एक मुख्य क्षेत्र था पर पाकिस्तान की मुहर लग चुकी है। जिस कारण भारतीय पुरात्तव विभाग से ज्ञान का एक व्यापक संसाधन दूर हो गया। किसी समय में जलमग्न रहा धोलावीरा जब विवर्तनिकी से सामने आया तो पु...

What is totem?????

What is TOTEM? टोटम क्या है? नमस्कार आप सभी का मेरे आज के इस ब्लॉग में। आज का ब्लॉग पिछले ब्लॉग से थोड़ा अलग होने वाला है क्योंकि आज के ब्लॉग में हम आधुनिक समाज में रहने के बावजूद उन लोगो के बारे में थोड़ा जानने का प्रयास करेंगे जो जीवन यापन तो 21वीं सदी में कर रहे हैं परंतु अपने रीतिरिवाजों संस्कृति पर अटूट पकड़ बनाए रहने के कारण हमसे पुर्णतः अलग जीवन व्यतीत करते हैं।  यदि हम मानव सभ्यता के बदलावों के रुख करें तो ज्ञात होता है कि इसका एक बेहद प्राचीन इतिहास रहा है। हमें ज्ञात है कि समाज शब्द का विकास संभवतः 19वीं शताब्दी के बाद ही हुआ है । यदि इस परिप्रेक्ष्य में धर्म की बात की जाए तो धर्म सदा मानव के साथ चलने वाली इकाई राही है। इस कथन को सत्य मानते हुए हम कह सकते हैं कि धर्म उतना ही प्राचीन रहा होगा जितना कि समाज है। सदियों से प्रकृति मानाव की रुचि का मुख्य केंद्र रही है। इन्ही रुचियों के कारण नए विचारों का उद्गम हुआ।  समय के साथ साथ जिस प्रकार समाज में बदलाव आया धर्म भी अपने बदलाव के चरणों से गुजरता गया । यदि गौर की जाए तो धर्म , संस्कृति अपने प्रथम चरण में ही शुद्ध अ...

Yes! We are in 21st century

Yes! We are in 21st century (हां! हम 21वीं शताब्दी में हैं) 21वीं शताब्दी यह सुनकर ही ऐसा प्रतीत होता है कि समय के चक्र के साथ हम कितना आगे निकल गए हैं। अक्सर मैं अपने लेखों में शुरुवात में फ़ोटो का सहारा नही लेता हूँ परंतु, इस शब्द को जो ऊपर दिया है, गौर से समझने के लिए मुझे ऐसा करना पड़ा। इस फोटो को ध्यान से देखिए ओर गौर कीजिए इसके एक एक शब्द को। ये मात्र चन्द शब्द ही नही हैं अपितु 21वीं शताब्दी का पूरा लेखा झोखा है। और ताजुब की बात यह है कि इसके आखिर में हरे लेख में यह लिखा है and more   मतलब यह पूरा विवरण नही है इसका । इन शब्दों के आगे भी बहुत ओर शब्द हैं  जो 21वीं सदी को बयां करे। ध्यान देने योग्य बात यह है कि जैसे जैसे हम अपने कदमों को आने वाले वर्षों की तरफ बढा रहे हैं इन शब्दों की संख्या बढ़ती जा रही है। परंतु क्या हम वास्तविकता में इन शब्दों का मतलब समझ पाए हैं यह आवश्य एक चिंतनीय विषय है। मेरा यह कथन मात्र किसी नेता की पंक्ति नही है बल्कि अपने आप में अनेकों सवाल छुपाए हुए है। आगे जाने से पहले मैं आपका ध्यान कुछ दृश्यों की तरफ करना चाहूंगा। Ad...

Discovery of India by European युरोप द्वारा भारत की खोज

Discovery of India by European युरोप द्वारा भारत की खोज भारत यह मात्र एक देश नही है अपितु विभिन्न सांस्कृतिक, धार्मिक, आर्थिक गतिविधियों का केन्द्र है। यदि विश्व के नक्शे पर संस्कृति,धर्म व आर्थिक रूपांतरण को बयां किया जाए तो शायद ही कोई अन्य देश होगा जो भारत की बराबरी कर सके। जिस समय सम्पूर्ण यूरोप पर ब्रिटैन का व्यापारिक प्रभुत्व था व पुनर्जागरण का ताज ब्रिटैन के सिर की शोभा बढ़ा रहा था उस समय यूरोप का उसकी कामयाबी से जलना स्वाभाविक था। जलन कब प्रतिकार का रूप ले गई शायद समय को भी इसका आभास ना हुआ। वैज्ञानिक,आर्थिक रूपांतरण व पुनर्जागरण के इस दौर में बैंकरों , व्यापारियों द्वारा जब मध्य वर्ग का उदय हुआ तो धीरे धीरे ब्रिटैन के व्यापार को बढ़ावा मिला । इसी बढ़ते व्यापार के कारण यूरोप को भी आर्थिक समृधी की चाह हुई और व्यापारिक जगत में उसका आगमन हुआ। नए पैमानों, कम्पास , नक्शों का काम जब जोर पकड़ने लगा तो समुद्री जगत द्वारा व्यापार करने की इच्छाओं का जागना अवश्यम्भावी हो गया था। क्योंकि अरब द्वारा मिस्र व पर्शिया को जीत लिया गया था जिस कारण व्यापार मुसलिम राज्यों द्वारा शुरू हुआ , चूं...

Your Memories (तुम्हारी यादें)

Your memories ( तुम्हारी यादें) ●ये लम्हे काटने दौड़ते हैं, जब यादें तुम्हारी दस्तक देती हैं। दिल उखड़ा सांसें भारी सी लगती हैं, जब दस्तक तुम्हारी यादें देती हैं।। ●यूँ तो पत्थर बन चुका हूं मैं इनदिनों, फिर भी नम आंखें हो जाती हैं, जब दस्तक तुम्हारी यादें देती हैं। ●तू सोया नींद के आहोश में वँहा, ओझल नींदें आंखों से यंहा रहती हैं, जब दस्तक तुम्हारी यादें देती हैं। ● एक घड़ी भी अरसे सी लगती है, जब दस्तक तुम्हारी यादें देती हैं। यूँ तो गौर करता नही में बीते कल पर, अरसे पुरानी बातें ताज़ी हो जाती हैं, जब दस्तक यादें तुम्हारी देती हैं। ●झुका नही कभी खुदा के सिवा कंही, गैरमौजूदगी तेरी मुझे ओकात दिखा देती है, जब दस्तक तुम्हारी यादें देती हैं। ● अक्सर खुद को नायाब बड़ा समझता मैं, तिजोरी खुशियों की खाली सी लगती है, जब दस्तक तुम्हारी यादें देती हैं। ●हां! गुमान करता हूँ मैं हाथों की लकीरों पर, पर अक्सर मुझे अपाहिज बना देती हैं, जब दस्तक तुम्हारी यादें देती हैं। For another poem click on link given below... “बेरंग समा" https://predatorash...

Changing India or myth?

Changing India or myth भारत यह मात्र एक शब्द ही नही अपितु स्वयं में  बदलाव का एक जीता जागता सबुत है। सिंधु घाटी सभ्यता से शुरू होकर मुगल काल, ब्रिटश काल तदोपरांत आज का आदुनिक युग इस देश ने बेहद अलग बदलावों का सामना किया है। इसलिए इसे यदि बदलावों का अनुभवी भी कहें तो भी गलत नही होगा। सिंधु घाटी सभ्यता जो कि विश्व की प्राचीनतम सभ्यताओं में से एक है इस बदलाव का मुख्य भाग है। यदि इसे भारत के बदलवा का आरंभिक चरण माने तो भी गलत नही होगा। भूमिगत निकासी , पानी का प्रबंध और भी अन्य कई उदाहरणों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आधुनिक युग की वैज्ञानिकता के पेड़ का बीज बहुत पहले बो चुका था। उस समय व्यक्ति को आगे बढ़ने की होड़ थी परंतु स्वार्थ का भाव मन में ना था। शायद तभी यह सभ्यता हर जगह समान रूप से विकसित हुई। आर्यों का आगमन भी इस देश के बदलावों के एक अंग रह चुका है। मध्य एशिया से आई इस नस्ल का प्रभाव आजतक देखने को मिलता है। धीरे धीरे जब सम्पूर्ण विश्व अपने वजूफ को पहचान रहा था भारत आकर्षण का एक ऐसा केंद्र बन गया जिसकी तरफ हर एक कोने से लोगो का आना शुरू हुआ। इस चेहरे को भला कोई कैसे भू...