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Discovery of India by European युरोप द्वारा भारत की खोज


  • Discovery of India by European युरोप द्वारा भारत की खोज


भारत यह मात्र एक देश नही है अपितु विभिन्न सांस्कृतिक, धार्मिक, आर्थिक गतिविधियों का केन्द्र है। यदि विश्व के नक्शे पर संस्कृति,धर्म व आर्थिक रूपांतरण को बयां किया जाए तो शायद ही कोई अन्य देश होगा जो भारत की बराबरी कर सके।
जिस समय सम्पूर्ण यूरोप पर ब्रिटैन का व्यापारिक प्रभुत्व था व पुनर्जागरण का ताज ब्रिटैन के सिर की शोभा बढ़ा रहा था उस समय यूरोप का उसकी कामयाबी से जलना स्वाभाविक था। जलन कब प्रतिकार का रूप ले गई शायद समय को भी इसका आभास ना हुआ। वैज्ञानिक,आर्थिक रूपांतरण व पुनर्जागरण के इस दौर में बैंकरों , व्यापारियों द्वारा जब मध्य वर्ग का उदय हुआ तो धीरे धीरे ब्रिटैन के व्यापार को बढ़ावा मिला । इसी बढ़ते व्यापार के कारण यूरोप को भी आर्थिक समृधी की चाह हुई और व्यापारिक जगत में उसका आगमन हुआ। नए पैमानों, कम्पास , नक्शों का काम जब जोर पकड़ने लगा तो समुद्री जगत द्वारा व्यापार करने की इच्छाओं का जागना अवश्यम्भावी हो गया था। क्योंकि अरब द्वारा मिस्र व पर्शिया को जीत लिया गया था जिस कारण व्यापार मुसलिम राज्यों द्वारा शुरू हुआ , चूंकि व्यापार का मार्ग मुस्लिम राज्यों द्वारा होता था तो वह मनमानी चूंगी वसूलते थे जिस कारण व्यापार में मुनाफा कम होता था। इस मुनाफे को बढ़ाने का जरिया मात्रा एक था समुद्री व्यापार की शुरुआत।
1487 में पुर्तगाली  नाविक बारथोलोम्पो डियाज़ भारत व पूर्व की धन संपत्ति की चाह में 
व साथ भी व्यापारिक नवीन विकल्पों को खोजने के लिए अफ्रीका के दक्षिणी तट पर पहुंचा जंहा उसने कैप ऑफ गुड होप की खोज की। वँहा से वह वापिस 1488 में लिस्बन लौट गया। उसकी इस खोज ने भारत तक पहुंचने का लगभग आधा काम खत्म कर दिया था।

                         वतर्मान में केप ऑफ गुड होप का चित्र
बारथोलोम्पो डियाज़ के नक्शे कदमों पर ठीक 10 सालों बाद वास्कोडिगामा 1498 में लिस्बन पर विजय के बाद पुद्रो केब्रैंल की अध्यक्षता में एक नाविक बेड़ा भारत भेजा गया परंतु अरब की मौजूदगी के कारण वह जेमोरिन को परास्त ना कर पाए और कोचीन व केंनोर में व्यापार सुरक्षित कर कालिकट छोड़ वापिस आ गया।
1502 में वास्को डी गामा जब कालीकट पहुंचा  तो उसके आक्रमण का केंद्र अरब के व्यापार बना क्योंकि जेमोरिन को अरब की ही शह थी।

इसलिए जेमोरिन को परास्त करने के लिए उसने अरब को व्यापार से वंचित रखा,उसपर आक्रमण किए व फितोरियों का निर्माण किया ।
जेमोरिन ने कब मुस्लिम व्यापारियों को हटाने से मना किया तो पुर्तगालियों द्वारा गोलीबारी की गई व कोचीन और कालीकट की शत्रुता का फायदा उठा  मलालबार में अपना पहला किला बनाया।  1509 में पुर्तगालियों ने मामलूक द्वारा भेजे जहाडों को परास्त किया जिससे उनका कब्जा दीव पर हो गया साथ ही 1510 में गोवा को भी कब्जे में ले लिया। इस प्रकार भारत की खोज के साथ वह एस्तदो द इंडिया नाम से जाने गए
भारत आने का कारण :- 
वैसे तो भारत आने का कारण उनका व्यापारिक  विस्तार था क्योंकि भारत कच्चे माल का गढ़ कहा जाता था परंतु उनका छुपा हुआ मंतव्य ईसाई धर्म का प्रचार करना  था। कई विद्वानों का कहना है कि मसालों के द्वीप का आकर्षण उन्हें भारत की तरफ ले आया।
वास्तविकता जो भी हो परंतु समुद्री मार्ग व नोसैनिक शक्ति का जो मोज़ायरा पुर्तगालियों द्वारा दिया गया उसने आधुनिक भारत में आगे  होने वाले बदलावों की रूपरेखा तैयार कर दी थी।

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