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हम और हम


  1. हम और हम


●अकेला सा पड़ जाता है इंसान
जब मतलब दुनिया के पूरे हो जाते हैं।
●भीड़ से अनजान हो जाता है इंसान,
जब बिगुल बगावत के बजाए जाते हैं।
●ये इंसान है, जात तो गद्दार होगी ही,
वफादारी के ताज तो सिर्फ कुत्तों को पहनाए जाते हैं।
●रिश्ते तब दरकिनार हो जाते हैं,
जब दरमियां मैं हम के आ जाते हैं।
●मिलनसार भी अजनबी बन जाते हैं,
जब अपनों के बीच फसाने गैरों के आ जाते हैं।
●जगह नही होती अहम की ग़ालिब रिश्तों में,
अहम जंहा आए रिश्ते वो अहमियत खो जाते हैं।
●कीमत बुलंदी की सिफर है अपनों में,
बिना अपनो के नायाब महल वीराने हो जाते हैं

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